कोरोना महापंचायत

‘एक के साथ अन्याय सभी के साथ अन्याय है’

प्रस्तावना 

1. हम, भारतीय मूलनिवासी, प्राकृतिक न्याय एवं भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त अपने मौलिक अधिकारों तथा अपने संतति की रक्षा के लिए कोरोना महापंचायत की कार्यवाही के अनुरूप आपराधिक जांच कर रहे हैं। यह महापंचायत आदर्श कानूनी कार्यवाही के रूप में कार्य करेगी , जो कि उन “नेताओं, आयोजकों, उकसाने वालों और और सहयोगियों” पर काररवाई करेगी, जिनके खिलाफ COVID-19 अपराधों के पुष्ट सबूत उपलब्ध हैं। उनपर आरोप है की उन्होंने कोरोना महामारी के आड़ में होने वाले भ्रष्टाचार एवं धोखे से भारत के करोड़ों लोगों को ठगने, उन्हें बीमार करने, जान से  मारने एवं सरकारी खजाने को लूटने के इस व्यापक षड्यन्त्र के निर्माण और निष्पादन में अंतर्राष्ट्रीय माफिया गिरोहों के साथ साँठ-गांठ कर इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया, सहायता की, या उकसाया। 

2. यह जांच लोगों की, लोगों द्वारा और लोगों के लिए है और इसे कोरोना महापंचायत’ के रूप में संदर्भित किया जाएगा। वर्तमान प्रणाली की अदालतों से उचित एवं सही समय पर न्याय न मिल पाने एवं वास्तविक साक्ष्य को सुनने के लिए उचित न्यायालय को खोजने में असमर्थ होने के कारण, हम इस कार्यवाही को वर्तमान प्रणाली के बाहर और प्राकृतिक कानून के आधार पर कर रहे हैं। यह हमारे इस दृढ़ विश्वास पर आधारित है कि प्रत्येक व्यक्ति आसानी से अच्छे और बुरे के बीच और सही और गलत के बीच अंतर कर सकता है।

3. आरोप यह है कि दुनिया की सरकारें भ्रष्ट और आपराधिक सत्ता संरचनाओं के नियंत्रण प्रभाव में आ गई हैं। उन्होंने एक महामारी के षड्यन्त्र का मंचन करने के लिए मिलीभगत की, जिसकी वे वर्षों से योजना बना रहे थे। इसके लिए उन्होंने जानबूझकर तथ्य के झूठे बयानों और एक सामाजिक रूप से इंजीनियर मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन के माध्यम से बड़े पैमाने पर दहशत पैदा की, जिसका संदेश उन्होंने कॉर्पोरेट मीडिया के माध्यम से दिया।

4. इस सामूहिक दहशत का उद्देश्य जनसंख्या को तथाकथित “टीकाकरणों” के लिए राजी करना था, जो इस बीच न तो प्रभावी, न ही सुरक्षित, बल्कि बेहद खतरनाक, यहां तक ​​​​कि घातक साबित हुए हैं। वयस्कों की भारी क्षति के बाद अब वे 12 से 14 साल के बच्चों को ये जहरीला टीका देना चाहते हैं और भारत के मूलनिवासी संतति को नष्ट कर, यहाँ की जमीन और सारे संसाधन हड़प कर, शेष जीवित लोगों को कमजोर कर उनका दमन करना चाहते हैं और उन्हें फिर से गुलाम बनाना चाहते हैं। 

5. इन अमानवीय अपराधों से दुनिया की आबादी को हुई आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य क्षति को उपलब्ध अंतर्राष्ट्रीय आकलन के अनुसार लगभग  8 करोड़ अरब रुपये (1 quadrillion US dollar )  में मापा जा सकता है। दुनिया के जनसंख्या का लगभग 15% होने से, भारत के लिए होने वाले आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य क्षति अनुमानित तौर से 120 लाख अरब रुपये का है।  

6. जनता द्वारा नियुक्त अभिवक्ता, भारत के कई उच्च सम्मानित वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सहायता से चयनित न्याय परिषद के तत्वावधान में, इस कोरोना महापंचायत का संचालन करेंगे और इस तरह भारत की जनता को मानवता के खिलाफ इन अपराधों की एक पूरी तस्वीर प्रदान करेंगे।

7. भारत की राजधानी नई दिल्ली में कल बुधवार दिनांक 23 मार्च, 2022 के कोरोना महापंचायत का दोहरा उद्देश्य है: एक ओर एक मॉडल कार्यवाही के रूप में काम करते हुए मानवता के खिलाफ काम करने वाले आपराधिक और नागरिक रूप से जिम्मेदार व्यक्ति प्रमुखों के खिलाफ अभियोग प्राप्त करना है। दूसरी ओर, वर्तमान भू-राजनीतिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि सहित पूरी तस्वीर दिखाकर – निम्नांकित बिंदुओं के बारे में जनता को जागरूक करना है :

– वर्तमान, अपहृत प्रणाली और उसके संस्थानों का तथ्यात्मक पतन, और, उसके परिणामस्वरूप

– भारत के मूलनिवासियों के लिए अपनी संप्रभुता को वापस लेने की आवश्यकता

– कोरोना महामारी के नाम पर लगाए गए सभी अनुचित सरकारी प्रतिबंधों की अवहेलना, एवं

– स्वास्थ्य, शिक्षा, अर्थ व्यवस्था, न्यायपालिका समेत समग्र एवं सतत मूलनिवासी प्रणाली शुरू करने की आवश्यकता, ताकि हमारे संविधान एवं 2007 में भारत सरकार समेत विश्व के सभी देशों द्वारा संयुक राष्ट्र महासभा में पारित संयुक्त राष्ट्र मूलनिवासी अधिकार घोषणा पत्र के निर्देशों का क्रियान्वयन (United Nations Declaration for Rights of Indigenous People UNDRIP 2007), जिसके आधार पर भारत में लोकतंत्र और धर्म सम्मत न्यायपूर्ण शासन फिर से स्थापित हो सके।  

कोरोना भ्रष्टाचार उन्मूलन संघर्ष वाहिनी की ओर से:

चंद्र विकाश 
सचेतक – गौ विश्व संसद 
(GAIA Earth Sansad – www.gaiasansad.com)
मूलनिवासी कार्यकर्ता वैश्विक संस्थान
मो: 8595397609 । twitter: @GSansad
ईमेल: gaiasansad@gmail.com
GAIA – Global Academy for Indigenous Activism
ब्लॉग: chandravikash.wordpress.com  

1 thought on “कोरोना महापंचायत

  1. Pingback: छद्म महामारी के आड़ में डब्ल्यूएचओ का विश्वासघाती षड्यन्त्र | GAIA – Global Academy of Indigenous Activism

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