Monthly Archives: April 2021

𝗦𝗵𝗼𝗼𝘁𝗶𝗻𝗴 𝘁𝗵𝗲 𝗠𝗼𝗼𝗻

There is a game of Hearts
Played with a full pack of cards
When you get a good hand
You ought to try no smarts.1

When the business is as usual
Follow the cut and dried ritual
Thou must not take any tricks
Keep the cards low, walk casual.2

But the game has an interesting rule
That makes it sassy and oh-so cool
When things just get out-of-hand
You can jump right into the pool.3

You must make up your mind soon
If you wish to ride the high noon
Pass the lows and pick every trick
Aim high and Shoot-the-Moon.4

If you lose even a single trick
With even one heart or the Queen maverick
You stand to lose all you have earned
The bubble bursts at the touch of a prick.5

Life gives you several such chances
Of quotidian chores and wild romances
When the odds are stacked daunting high
It comes up with such freaky nuances.6

Shoot-the-Moon but don’t break Hearts
Don’t use it to hit where it hurts
Nature wears that one card up its sleeve
Hell breaks loose when the bubble bursts.7

Like the Ponzi gamble that the bankers play
They keep giving loans as their masters say
But tweak the rules in self-interest
Making the slaves toil night and day.8

Or lopsided rules like the “Polluters Pay”
This is not how even the jungle predators prey
They don’t poison the pond where the fishes swim
And wait to die-off before they trawl away.9

Greed “trickles down” is another fat lie
It sucks up the poor to starve and die
Inequality hits the roof and robs them further
Leaving the young and children high and dry.10

Predators in the jungle don’t shift-the-burden
Turn Earth into hell, what was once heaven
Make them sick and miserable with a killer vaccine
Whither civilisation! This is a mafia den.11

Shoot-the-Moon and not the messenger
Who tell the truth however unpopular
And burst the bubble of lies and hoaxes
On viruses masks and lockdowns asunder.12

Shoot-the-Moon when the chips are down
To win Hearts and the victor’s crown
Of the dice clubs and spades alike
Let joy and cheer wipe out the frown.13

  • Chandra Vikash
    12.04.2021

This poem is dedicated to all the lovers of Hearts…

🙂♥️🙏

संयुक्त राष्ट्र इंडिजेनस*(यानी स्वदेशी/ आदिवासी/ दलित/मूल निवासी) अधिकार घोषणा पत्र – हिंदी अनुवाद

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंगीकृत संकल्प-पत्र 

संयुक्त राष्ट्र इंडिजेनस*(यानी स्वदेशी/ आदिवासी/ दलित/मूल निवासी) अधिकार घोषणा पत्र

61/295। 13 सितम्बर 2007  

संयुक्त राष्ट्र महासभा, 

संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के उद्देश्यों एवं सिद्धांतों से प्रेरित होकर एवं चार्टर के अनुसार राज्यों से ग्रहण दायित्वों की पूर्ति में अच्छे विश्वास से,

पुष्टि करता है कि स्वदेशी सभी अन्य लोगों के बराबर हैं, यह संज्ञान लेते हुए कि सभी लोगों को विविध होने और समझने का अधिकार है, और उनका उसी तरह से सम्मान किया जाना है,

यह भी पुष्टि की है कि सभी लोग सभ्यताओं और संस्कृतियों की विविधता और समृद्धि में योगदान करते हैं जो मानव जाति की साझी विरासत है,

आगे पुष्टि  की है कि वे सभी सिद्धांत, नीति और प्रथा जो राष्ट्रीय मूल, नस्ल, धार्मिक, या सांस्कृतिक अंतर के आधार पर लोगों या व्यक्तियों की श्रेष्ठता की वकालत करते हैं, वैज्ञानिक रूप से गलत है, कानूनी तौर पर अमान्य, नैतिक रूप से निंदनीय और सामाजिक अन्याय हैं,

पुष्ट कि स्वदेशी लोगों को, उनके अधिकारों का प्रयोग करते हुए किसी भी तरह के भेदभाव से मुक्त किया जाना चाहिए,

चिंतित है कि आदिवासी, अन्य बातों के साथ, औपनिवेशिक आतंकवाद और उनकी भूमि, प्रदेशों और संसाधनों की हिंसक बेदखली के परिणाम के रूप में ऐतिहासिक अन्याय से पीड़ित है, जिससे उन्हें, विशेष तौर पर, उनकी जरूरतों और हितों के अनुसार विकास करने से रोका गया,

स्वीकार करते हुए कि आदिवासिओं के निहित अधिकारों का सम्मान करने और उनको बढ़ावा देने की तत्काल आवश्यकता है, जो उनके राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक ढांचे, उनकी संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा, इतिहास और दर्शन , विशेष रूप से उनकी भूमि, प्रदेशों और संसाधनों के उनके अधिकारों से निकलते हैं.

स्वीकार करते हुए कि आदिवासियों के, संधियों, करारों और राज्यों के साथ अन्य रचनात्मक व्यवस्था में पुष्ट अधिकारों का सम्मान करने और उन्हें बढ़ावा देने की तत्काल जरूरत है.  

इस तथ्य का स्वागत करते हुए कि स्वदेशी समाज राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक वृद्धि और उनके प्रति भेदभाव और उत्पीड़न के सभी रूपों का अंत करने के लिए, जहाँ भी वे होते हैं, खुद को व्यवस्थित कर रहे हैं. 

स्वीकार करते हुए कि स्वदेशी ज्ञान, संस्कृतियाँ और पारंपरिक प्रथाये, सतत और न्यायसंगत विकास और पर्यावरण के उचित प्रबंधन में योगदान देती है,

बल देते हुए कि स्वदेशी लोगों के भूमि और प्रदेशों के विसैन्यीकरण का. शांति, आर्थिक और सामाजिक प्रगति एवं राष्ट्र और विश्व के लोगों के बीच समझ और मैत्रीपूर्ण संबंधों को योगदान है. 

विशेष रूप से स्वीकार करते हुए कि स्वदेशी परिवारों और समुदायों को 

अपने बच्चों की परवरिश, प्रशिक्षण, शिक्षा और भलाई की साझा जिम्मेदारी बनाए रखने का अधिकार है. 

यह स्वीकार करते हुए कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों का अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध, नागरिक और राजनीतिक अधिकारों का अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध, वियना घोषणा और कार्य योजना, सभी देशों के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का मौलिक महत्व वाणी की पुष्टि करते हैं,जिससे  वे स्वतंत्र रूप से अपने राजनीतिक स्थिति तय कर सकते हैं और  अपने आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास की ओर अग्रसर हो सकते हैं. 

यह संज्ञान लेते हुए कि इस घोषणा में कुछ भी नहीं जिसका, अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप, लोगों के आत्मनिर्णय के उनके अधिकार से इनकार करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है

विश्वास है कि यह घोषणा स्वदेशी लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रता की मान्यता, संवर्धन और  संरक्षण की और इस क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की प्रासंगिक गतिविधियों के विकास की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है,

स्वीकार और पुष्ट करती है कि स्वदेशी व्यक्ति, बिना किसी भेदभाव के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सभी मानव अधिकारों के दावेदार है. स्वदेशी लोगों को उन सामूहिक अधिकार  का स्वत्व है जो उनके अस्तित्व, कल्याण और लोगों के अभिन्न विकास के लिए अपरिहार्य हैं.

यह मानते हुए कि स्वदेशी लोगों की स्थिति और देश से देश के लिए और राष्ट्रीय और क्षेत्रीय विशेषताओं और विभिन्न ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के महत्व को ध्यान में रखा जाना चाहिए कि क्षेत्र क्षेत्र से भिन्न होता है,

सत्यनिष्ठा से यह दावा करता है कि “स्वदेशी लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र का घोषणा-पत्र” उपलब्धि का एक मानक है जिसका सहभागिता की भावना और आपसी सम्मान से अनुसरण हो:  

अनुच्छेद 1

संयुक्त राष्ट्र के चार्टर, सर्वगत मानव अधिकार की घोषणा-पत्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून में मान्य सभी मानवाधिकार और मौलिक स्वतंत्रता आदिवासियों को, सामूहिक या व्यक्तिगत तौर पर, प्राप्त हैं।

अनुच्छेद 2

स्वदेशी स्वतंत्र हैं और अन्य सभी से बराबर हैं. उन्हें अपने स्वदेशी मूल या पहचान के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव से स्वतंत्रता है।

अनुच्छेद 3

स्वदेशी को स्वाधीनता का अधिकार है। इस अधिकार के तहत वे स्वतंत्र रूप से अपने राजनीतिक स्थिति तय कर सकते हैं एवं अपने आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए स्वतंत्र हैं।

अनुच्छेद 4

आदिवासियों को उनके आंतरिक और स्थानीय मामलों में एवं उनकी वित्तीय व्यवस्था के लिए, स्वायत्तता या स्वशासन का अधिकार है।

अनुच्छेद 5

आदिवासियों को, उनके विशेष राजनीतिक, कानूनी, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थानों को बनाए रखने और मजबूत करने का अधिकार है. इसके साथ साथ, यदि वे चाहें तो (वर्त्तमान) राज्य के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी पूरी सहभागिता कर सकते हैं।

अनुच्छेद 6

हर स्वदेशी को राष्ट्रीयता का अधिकार है।

अनुच्छेद 7

1. आदिवासियों को जीवन, शारीरिक और मानसिक सम्पूर्णता ,स्वाधीनता और वैयक्तिक सुरक्षा के अधिकार हैं।

2. आदिवासियों को विशेष लोगों के तौर पर, स्वतंत्रता, शांति और सुरक्षा में जीने का सामूहिक अधिकार है.  उनके साथ नरसंहार या हिंसा के किसी भी अन्य कृत्य नहीं किये जा सकते। उनके बच्चों को एक समूह से हटकर दुसरे समूह में जबरन नहीं डाला जा सकता है।

अनुच्छेद 8

1. स्वदेशी लोगों और व्यक्तियों को मजबूरन समावेशित और उनकी संस्कृति का विनाश नहीं किया जा सकता है ।

2. राज्य निम्नांकित बिंदुओं पर रोकथाम और निवारण के लिए के लिए प्रभावी तंत्र प्रदान करेगा:

(क) कोई कार्रवाई जिसका उद्देश्य उन्हें उनकी सम्पूर्णता, सांस्कृतिक मूल्यों

या जातीय पहचान से वंचित करना है

(ख) कोई भी कार्रवाई जिसका उद्देश्य उनकी भूमि, प्रदेशों या संसाधनों से बेदखल करना है;

(ग) किसी भी रूप में मजबूरन आबादी हस्तांतरण जिसका उद्देश्य या प्रभाव, उनके अधिकारों का उल्लंघन या उन्हें कम करने का हो;

(घ) किसी भी रूप में समावेश या एकीकरण;

(ई) जातीय या नस्लीय भेदभाव को बढ़ावा देने या उनके खिलाफ उत्तेजित करने के लिए किया गया कोई भी प्रचार ।

अनुच्छेद 9

स्वदेशी लोगों को अपने समुदाय या राष्ट्र की परंपराओं का पालन करने का अधिकार है। इसमें कोई भेदभाव नहीं बरता जा सकता।

अनुच्छेद 10

स्वदेशी लोगों को जबरन उनकी भूमि या प्रदेशों से हटाया नहीं किया जाएगा । बिना उनके स्वच्छन्द, पहले से और पूरी जानकारी से हुई सहमति के बिना कोई स्थानांतरण नहीं किया जा सकता. उन्हें उचित मुआवजा के साथ, जहां संभव हो, इस समझौते में जमीन वापसी का विकल्प भी होना चाहिए।

अनुच्छेद 11

1. आदिवासियों को उनके सांस्कृतिक परंपराओं और रिवाज़ों को निभाने और पुनर्जीवित करने का अधिकार है। इसमें उनकी संस्कृति – जैसे कि पुरातात्विक और ऐतिहासिक स्थल, कलाकृतियों, डिजाइन, समारोह, प्रौद्योगिकी, दृश्य और प्रदर्शन कला और साहित्य – के अतीत, वर्तमान और भविष्य की अभिव्यक्तियों की पोषण, रक्षा और विकास, सम्मिलित हैं।

2. आदिवासियों की सांस्कृतिक, बौद्धिक, धार्मिक और आध्यात्मिक संपत्ति, जिन्हें उनके मुक्त, पूर्व और सूचित सहमति के बिना या उनके कानूनों, परंपराओं और रीति-रिवाजों के उल्लंघन में लिया गया, उनके लिए राज्य प्रभावी तंत्र के माध्यम से, आदिवासियों के सहमति से, निवारण प्रदान करेगा। 

अनुच्छेद 13

1. आदिवासियों को उनके इतिहास, भाषा, मौखिक परंपरा, दर्शन, लेखन प्रणालियों और साहित्य के पुनर्जीवन, उपयोग, विकास और आने वाली पीढ़ियों को उनके संचारण का एवं और समुदायों, स्थानों और व्यक्तियों के लिए अपने स्वयं के नामकरण करने का अधिकार है.

2. राज्य इन अधिकारों के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए यह प्रभावी उपाय करे और यह भी सुनिश्चित करे कि स्वदेशी राजनीतिक, कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही को समझ सकें और उन्हें समझा जा सके. जहां आवश्यक हो वहां व्याख्या के माध्यम से या अन्य उपयुक्त साधन  का प्रावधान करे।

अनुच्छेद 14

1. आदिवासिओं को उनके अपनी भाषा में शिक्षा प्रणाली और शिक्षण संस्थाओं को स्थापित करने और नियंत्रित करने का अधिकार है, जहाँ वे अपनी शिक्षण पद्धति के लिए उपयुक्त सांस्कृतिक तरीकों को अपना सकें।

2. स्वदेशी व्यक्तियों, विशेष रूप से बच्चों, बिना किसी भेदभाव के राज्य की शिक्षा के सभी स्तरों और स्वरुप का अधिकार है।

3. यह अधिकार, अपने समुदायों के बाहर रहने वाले, विशेषकर बच्चों को भी उपलब्ध हो.  

अनुच्छेद 15

1. आदिवासिओं को गरिमा और उनकी संस्कृतियों, परंपराओं, इतिहास और आकांक्षाओं के विविधता का अधिकार हैं, जो उचित रूप से शिक्षा और सार्वजनिक जानकारी में परिलक्षित हो।

2. राज्य को स्वदेशी लोगों के साथ परामर्श और सहयोग करते हुए, पूर्वाग्रह का मुकाबला करने, भेदभाव को खत्म करने; सहिष्णुता, समझ को बढ़ावा देने के लिए और स्वदेशी लोगों के और समाज के अन्य सभी वर्गों के बीच अच्छे संबंधों के लिए, प्रभावी कदम उठाने होंगे। 

अनुच्छेद 16

1. स्वदेशी लोगों को अपनी भाषा में अपने स्वयं के मीडिया स्थापित करने का अधिकार है और बिना किसी भेदभाव के सभी रूपों के गैर स्वदेशी मीडिया के उपयोग करने का भी अधिकार है।

2. राज्य को प्रभावी उपाय से सुनिश्चित करना है कि राज्य द्वारा संचालित मीडिया विधिवत स्वदेशी सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं और इसके लिए निजी संचालित मीडिया को बिना भेदभाव या पूर्वाग्रह के प्रोत्साहित करना है. 

अनुच्छेद 17 

आदिवासियों को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू श्रम कानून के तहत सभी अधिकार हैं।

अनुच्छेद 18

आदिवासियों को उन मामलों के निर्णय में, जो उनके अधिकारों को प्रभावित करती है, प्रतिनिधियों के माध्यम से  भाग लेने का अधिकार है. ये प्रतिनिधि उनके द्वारा और उनके स्वयं के प्रक्रियाओं के अनुसार चुने होने चाहिए. 

अनुच्छेद 24

1. स्वदेशी लोगों को उनके पारंपरिक दवाओं और स्वास्थ्य प्रथाओं को बनाए रखने तथा उनके सहित महत्वपूर्ण औषधीय पौधों, जीव-जंतुओं और खनिज के संरक्षण का अधिकार हैं। स्वदेशी व्यक्तियों को बिना किसी भेदभाव के सभी सामाजिक और स्वास्थ्य सेवाओं के भी उपयोग का अधिकार है।

2. स्वदेशी व्यक्तियों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उच्चतम प्राप्य मानक की सुविधा का समान अधिकार है।

अनुच्छेद 30

स्वदेशी लोगों के भूमि या क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां नहीं हो सकती जबतक कि स्वदेशी लोगों के द्वारा प्रासंगिक जनहित या अन्यथा स्वतंत्र रूप से सहमति या निवेदन न किया जाए।

अनुच्छेद 36

अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं द्वारा विभाजित स्वदेशी लोगों को संपर्क, संबंध एवं सहयोग बनाए रखने और विकसित करने का अधिकार है, जिसमें स्वदेशी एवं सीमा पार अन्य लोगों के साथ आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों भी सम्मिलित हैं,

अनुच्छेद 40

आदिवासियों के लिए राज्य या अन्य दलों के साथ टकराव और विवादों के समाधान के लिए न्यायपूर्ण  और निष्पक्ष प्रक्रिया की पहुँच और शीघ्र निर्णय का अधिकार है. इसमें उनकी व्यक्तिगत और सामूहिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए प्रभावी उपचार का अधिकार भी है। इस निर्णय में स्वदेशी परंपराओं और रिवाज़ों, उनके नियम और कानूनी व्यवस्था तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार का भी विचार देना होगा,  

अनुच्छेद 41

संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के विभिन्न अंग और विशेष एजेंसियाँ  तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन, अन्य बातों के साथ, वित्तीय सहयोग और तकनीकी सहायता के लामबंदी के माध्यम से, इस घोषणा के सम्पूर्ण प्रावधानों की प्राप्ति करने में योगदान करे।स्वदेशी लोगों को प्रभावित करनेवाले मुद्दों पर उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के तरीके और साधन स्थापित किये जाएंगे।

अनुच्छेद 42

संयुक्त राष्ट्र, उसके विभिन्न अंग, स्वदेशी मुद्दोंपर स्थायी फोरम और विशेष एजेंसियों सहित, सभी राज्य इस घोषणा के प्रावधानों के प्रति सम्मान को बढ़ावा दें और पूर्ण अनुपालन करें।

अनुच्छेद 43

यहां स्वीकृत अधिकार विश्व के स्वदेशी लोगों के अस्तित्व की रक्षा, उनकी गरिमा और कल्याण के न्यूनतम मानक स्थापित करते हैं।

अनुच्छेद 46

1. इस घोषणा में कुछ भी नहीं जिसे किसी भी राज्य, लोग, समूह या व्यक्ति द्वारा संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के विपरीत किसी भी गतिविधि में संलग्नहोने के अधिकार के अर्थ में व्याख्या की जा सकती है। इसका अर्थ क्षेत्रीय अखंडता या संप्रभु और स्वतंत्र राज्यों की राजनीतिक एकता को पूरी तरह या आंशिक रूप से तोड़ने या बांटने के अधिकृत या प्रोत्साहित करने के रूप में नहीं किया जा सकता।

2. वर्तमान घोषणा में प्रतिपादित अधिकारों के प्रयोग में, सभी के मानव अधिकार और मौलिक स्वतंत्रता का स म्मान किया जाएगा। इस घोषणा में उल्लिखित अधिकार सिर्फ कानून द्वारा निर्धारित और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार बाध्यताओं से ही सीमित होंगे। इस तरह की कोई भी सीमा गैर भेदभावपूर्ण होगी और दूसरों के अधिकारों और स्वतंत्रता के पहचान और सम्मान के लिए और एक लोकतांत्रिक समाज के न्यायपूर्ण और सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए होगी।

3. इस घोषणा में उल्लिखित प्रावधानों की व्याख्या न्याय, लोकतंत्र, मानव अधिकार के प्रति सम्मान, समानता, भेदभाव, सुशासन और नेक विश्वास के सिद्धांतों के अनुसार की जायेगी।

Art from the Heart – Splendour Colorful and Full of Life

𝗩𝗶𝘀𝗶𝘁 𝘁𝗼 𝙚𝙢𝙞𝙣𝙚𝙣𝙩 𝙖𝙧𝙩𝙞𝙨𝙩𝙨
Sachindranath Jha 𝗮𝗻𝗱 Supriya Jha 𝗶𝗻 𝗚𝘂𝗿𝘂𝗴𝗿𝗮𝗺 𝘁𝗵𝗶𝘀 𝗙𝗿𝗶𝗱𝗮𝘆

My association with Sachindra ji goes back to over a decade and a half when we were neighbors in Palam Vihar in old Gurgaon. Though we come from very different backgrounds and before meeting him, I hardly knew about the world of art and sculpture, some chord struck that enriched my worldview in many colorful and vibrant ways.

I was then working then with TCS with my office in nearby Udyog Vihar. In about 3 years of our stay there, I would spend long hours watching him plan and paint larger than life size canvases and the much smaller portrait ones. One thing I observed is the tremendous amount of mental and physical effort that goes into every artwork.

Alka Vikash has known him from much before when my in-laws supported him to set up Sanskritik Kutir in Patna where he started as an art teacher. One of our prized possession of an exquisite Radha Krishna painting with a mirror in Radha’s hands sitting in Krishna’s embrace and a peacock overlooking is a wedding gift from him. Though I believe that every such soulful and joyous work of art is priceless, I was astonished to learn that a similar size canvas by him of 3 avatars of Vishnu – Krishna Balaji and Buddha fetches a price of 8 lakhs INR.

From those humble beginnings in Patna to rising in fame and glory as a much acclaimed artist whose work is displayed in galleries and drawing rooms in India and abroad, he indeed has come a long way. He is most ably supported by Supriya bhabhi, an acclaimed Madhubani artist in her own right. She was recently invited by popular singer Maithili Thakur for paintings for her new house in Dwarka. She also runs the art page Aakar Mithila . They have two equally talented and loving sons Satyarth and Siddhant. They are award winning chess players.