Monthly Archives: December 2017

Cleaning up the political mess

Dr. Mahesh Chandra Sharma, former Rajya Sabha MP and Rajasthan State BJP President, leading Swadeshi thinker and an honest, sincere and highly respected leader is the real and brighter side of Bharatiya Janata Party that I support. In many to most ways he is the antithesis of Narendra Modi who represents it’s fake, ugly and flamboyant side.

I have met him 3-4 times at various events. Last I met him was 4 days back at his residence, a day after he called up in response to my invitation(१) to preside over a symposium with the Puri Shankaracharya Nischalanand Saraswati ji.

It was a long and heart to heart talk of over 2 hours on why Modi was betraying Deendayal Upadhyay ji’s Swadeshi vision which forms the core ideology of BJP and why Swadeshi champions like Mahesh ji have meekly allowed Modi to make India into a de facto colony of America.

Initially, he suggested that it was BJP’s majboori to lean towards America to win the 2014 elections. But after my hard grilling over next one hour in which I presented him various facts and insights into the current and emerging geo-political scenario, he warmly accepted that Modi does not represent the real face of BJP. I appealed to him to remove both Modi and Jaitly with immediate effect. He will return to Delhi on 30th of December and has promised to meet again. In the meantime, I have just finished his excellently compiled speeches in RS from 1996 to 2002 into a book called संसद में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद।

I also believe that he is best suited to be India’s next Prime Minister after Modi leaves in all likelihood by 30 December in 3 days now or at the earliest possible.

Here is a short bio of Dr. Mahesh Chandra Sharma for your reference.

President of Ekatma Manav Darshan Anusandhan Evam Vikash Pratishthan
Ex. Member of Parliament, Rajasthan (Rajya SAbha)
Ex. Rajashthan State President, BJP

Lecturer, (1971-72) Degree College Laxman Garh, District Sikar (Rajasthan)
(i) Manthan
(ii) Swadeshi Patrika
Organiser, R.S.S. in District Sikar (Rajasthan) 1971-77
Detained under M.I.S.A. during emergency period, 1975-77
Organising Secretary, North Zone, Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad, 1977-83 Secretary, Deendayal Research Institute, New Delhi, 1983-96
Chairman, Research and Development Foundation for Integral Humanism since
15 December 1999

Honored with ‘Saraswati Award’ by Uttar Pradesh Hindi Sansthan on the occasion of Hindi Diwas on September 1992

Books Published:-
(i) Deendayal Upadhyaya : Kartritva Evam Vichar
(ii) Sanskritic Rashtravad : Akhand Bharat
(iii) Bibhajan Aswikar
Contributing regular column “Vishwa Varta” and “Apna Desh” appearing in Rajasthan Patrika, Swatantra Bharat, Dainik Jagran, Ranchi Express, Lokmat Samachar, Sentinel, etc.and yearly souvenir Akhand Bharat Smaranika

Many of you have been fighting shy to support my out-of-the-box campaign to clean up the political mess in India and then the world to ensure a livable and sustainable planet for humans and for generations to come.

Believe me even my own younger brother got convinced just an hour back that I am quite serious about it and all the sweat and toil over the past 7 years as a political activist and the valiant sacrifices of my family especially my wife Alka has been making was not in vain.
It’s equally remarkable that we have been so generously supported by our families both on my in-laws side and my side and our loving and caring neighbors at Krishna Apra Gardens, despite the fact that most of them have been Modi supporters.

It’s been a rough and turbulent ride at times as most people thought that I was just an idealist fool if not crazy and deluded about taking up such a huge challenge.

This would have never been possible without a deep love for humanity and especially farmers, who I believe are the gods who nurture us by growing food and keep us alive even if they have to sacrifice their lives. And a deep belief in the eternal truth that Truth alone Wins.

Living with the truth is never easy. The initial hurdles are daunting and one big reason why I could even survive in India is because this society values knowledge and talent much more than money alone even as it’s essential for our survival and well-being.

To a great extent that owes a lot to our rich and long spiritual heritage that defines our duty way beyond material success alone. In this regard, I can in no words describe my gratitude to my Guru who is also Jagadguru Shankaracharya Swami Nischalanand Saraswati.

He showed me the light that I was indeed on the right path in the darkest hour before dawn breaks. He guided me to my duties as a Kshatriya Grihastha to clean up the political mess and establish a new world order that is fair, just and equitable.

It’s a Duty unto Victory.

Date: 2017-12-19
Subject: Emergency Meeting Invitation on Vikash Vimarsh from 20-24 December in Delhi


डॉ मुरली मनोहर जोशी जी
रामलाल जी
यशवंत सिन्हा जी
डॉ विनय सहस्रबुद्धे जी
गोविन्दाचार्य जी
बसवराज पाटिल जी
राम बहादुर राय जी
डॉ सुब्रह्मनियन स्वामी जी
राजनाथ सिंह जी
जनरल वी के सिंह जी
डॉ महेश चंद्र शर्मा जी
डॉ महेश शर्मा जी (संस्कृति मंत्री)
विराग गुप्ता जी
रजत मिश्रा जी


आज विनाशकारी विकाश (विकास) से जूझ रहे देश एवं विश्व के संकट काल में विकाश के प्रचलित अवधारणाओं पर विमर्श की आवश्यकता है. इसी विचार से राजधानी देहली के हौज़ खास में स्थित जगन्नाथ मंदिर के प्रांगण में दिनांक २० दिसंबर से २४ दिसंबर को “विकाश विमर्श” संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है. इसका प्रारंभिक सत्र कल बुधवार २० दिसंबर को सांय ०४:३० बजे से शुरू होगा जिसे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी सम्बोधित करेंगे. संगोष्ठी का समापन सत्र रविवार २४ दिसंबर को ११ बजे से १ बजे तक होगा.

कल ही समापित हुए गुजरात में विधान सभा के चुनाव की समीक्षा करते हुए एवं उससे उत्पन्न आपातकालीन स्थिति के संकेत से अल्प अवधि में आप सबको इस संगोष्ठी में आपकी सहभागिता का विशेष आग्रह है.

यह दुखद एवं चिंताजनक है कि जिस चुनाव के लिए प्रधानमन्त्री पद की गरिमा तक को दांव पर लगा दिया गया, उसे “विकास” के नाम का सेहरा दिया जा रहा है.(१,२)) उसी “गुजरात मॉडल” के विकास को, जिसे गुजरात की जनता ने “विकास गांडो थयो छे” कहकर सरफिरा विकास करार कर चुकी है. “गुजरात मॉडल” के विकास के नाम पर यह भारत के गौरवशाली लोकतंत्र का चीर-हरण है, जिसके वीभत्स अपराध पर मूक दर्शक बने रहने वाले भी विदुर नीति के अनुसार उस पाप के एक-तिहाई भागीदार हैं.

इस विनाशकारी विकास से उत्पन्न आज समाज के सामने अनेक ज्वलंतशील मुद्दे हैं जिनपर इस ४-दिवसीय संगोष्ठी में विशेष चर्चा होगी.

१. कृषि एवं उद्यम तंत्र की दुर्दशा – किसानों की आत्म-हत्या एवं गौ हत्या को कैसे रोका जाए?
२. बेरोजगारी या आजीविका असुरक्षा क्यों?
३. महंगाई एवं आर्थिक विषमता – मेट्रो रेल के किराए में अनुचित वृद्धि क्यों?
४. शिक्षा, स्वास्थ्य एवं न्याय तंत्र के व्यवसायीकरण के भयावह परिणामों के बावजूद भी इनपर रोकथाम क्यों नहीं लग पा रही? – कोचिंग का छात्रों पर प्रकोप, फोर्टिस एवं मैक्स जैसे अनेक हस्पतालों में मरीजों की लूट और दुर्दशा, सुप्रीम कोर्ट के फटकार के बावजूद साढ़े चार साल से अधिक समय से संत आसाराम बापू के केस का फैसला क्यों नहीं हो पा रहा.

इस संगोष्ठी का आयोजन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी के राष्ट्रव्यापी “धर्म, राष्ट्र एवं आध्यात्म” अभियान के देहली चरण के तत्वाधान में किया जा रहा है. वे कल प्रातः बुधवार २० दिसंबर को भोपाल, इंदौर, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई एवं पुणे के अपने कार्यक्रम के पश्चात देहली पधार रहे हैं.

आप सबसे पिछले ५ वर्षों में विभिन्न समय एवं परिस्थितिओं में मिलने का जो सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ है उससे मुझे आशा है कि आप इस संगोष्ठी के सफल आयोजन में आपके व्यस्त कार्यक्रमों के बावजूद भी आप सबका सहयोग प्राप्त होगा. आज देश को आपके मार्गदर्शन एवं प्रेरणा की आवश्यकता है.

इस संगोष्ठी में आपको आमंत्रित करते हुए मुझे हार्दिक प्रसनता है. इस संगोष्ठी में आमंत्रित राष्ट्रीय विचारक एवं गणमान्य राजनीतिज्ञ विभिन्न सत्रों में विमर्श करेंगे एवं संगोष्ठी के अंत में देश एवं विश्व के सामने अपनी प्रस्तावना रखेंगे।


संगोष्ठी: विकाश विमर्श
स्थान: जगन्नाथ मंदिर, हौज़ खास विलेज रोड, नयी देहली

दिनांक: बुधवार २० दिसंबर
उद्घाटन सत्र: धर्म सभा – वर्णाश्रम व्यवस्था क्या है और आज इसकी क्या प्रासंगिकता है
समय: ०४:३० बजे से ०७:३० बजे तक
व्यासपीठ श्रीमद जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती

दिनांक: गुरूवार २१ दिसंबर
द्वितीय सत्र: वर्णाश्रम व्यवस्था – संगोष्ठी
समय: ११०० बजे से ०१३० बजे तक
अध्यक्ष: श्री के एन गोविंदाचार्य

दिनांक: गुरूवार २१ दिसंबर
तृतीय सत्र: क्या वर्णाश्रम व्यवस्था के विघटन का परिणाम ही विनाशकारी विकास है? – परिचर्चा
समय: ०४:३० बजे से ०७:३० बजे तक
अध्यक्ष: श्री (डॉ) मुरली मनोहर जोशी

दिनांक: शुक्रवार २२ दिसंबर
चतुर्थ सत्र: वर्णाश्रम व्यवस्था एवं धर्म-सम्मत विकाश – संगोष्ठी
समय: ११०० बजे से ०१३० बजे तक
अध्यक्ष: श्री (डॉ) महेश चंद्र शर्मा

दिनांक: शुक्रवार २२ दिसंबर
पंचम सत्र: “संस्कृत नगरी एवं प्राकृत ग्राम” – विकाश की अवधारणा का सम्बोधन
समय: ०४:३० बजे से ०७:३० बजे तक
वक्ता: श्री चंद्र विकाश (आई आई टी खड़गपुर, आई आई एम कोलकाता)
धर्म-सम्मत अर्थशास्त्री एवं पर्यावरणविद
अध्यक्ष:श्री यशवंत सिन्हा

दिनांक: शनिवार २३ दिसंबर
षष्ठ सत्र: “संस्कृत नगरी एवं प्राकृत ग्राम” – संगोष्ठी
समय: ११०० बजे से ०१३० बजे तक
अध्यक्ष: श्री राम बहादुर राय

दिनांक: शनिवार २३ दिसंबर
सप्तम सत्र: संगोष्ठी प्रस्तावना परिचर्चा
समय: ०४:३० बजे से ०७:३० बजे तक
अध्यक्ष: श्री (डॉ) विनय सहस्रबुद्धे

दिनांक: रविवार २४ दिसंबर
विकाश विमर्श संगोष्ठी प्रस्तावना प्रस्तुति एवं समापन सत्र
International version: Development Deliberations in a Secular Idiom
समय: ११०० बजे से ०१३० बजे तक
व्यासपीठ श्रीमद जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती

जय जगन्नाथ!

चंद्र विकाश
विकाश विमर्श संगोष्ठी


The Universe of Love – featuring Prabha Sharma Sajan

Poetry conversations
I am a Love universe~~~
In love with all~~~
In the deepest chamber ~~~
Oh Qalb~~~
There is a spiritual fragrance of light~~~
That light can expand and excite ~~~
I know~~~
My heavy breath~~~
In a lotus dance~~~
I am slayer of the gaze ~~~
Interlacing your fibres with my love fluid~~~
Upward rising~~~
In silent explosions~~~
The caress of cosmic fusion~~~
Unlock Me~~~
Release this chastity belt of longing~~~
All is a matter of perception~~~
and yours is beyond space and time~~~
You are the witness~~~
~~~and Prabha is the scent
Now its dark~~~
Moon is ripe~~~
Night is thirsty~~~
High tides colliding on the stormy shores~~~
Let’s go~~~
Find me a cave ~~~
Where you can whisper the wind’s song in my ears~~~
and undress the earth~~~
Tears of enlightenment~~~
Smudging kohl~~~
Like a flower~~~
~~~She will drink the rain
~~~The universe seems to come alive
~~~With these verses
~~~It rehearses
~~~the rhythms of life
~~~Unbounded abundance of
~~~Love joy and bliss
~~~It holds back
~~~Till a time comes
~~~Brimming with joy
~~~It must give back
~~~In bursts of ecstasy
~~~And breathtaking splendor
~~~Overwhelmed and overpowered
~~~She surrenders
~~~With a deeper realisation
~~~Of having arrived
Where she always wanted to be~~~
Your verse a bouquet of ecstasy ~~~
lifts the vibration of nuances~~~
swinging on the passion song of life ~~~
weaving the elixir of love into the Soul ~~~
~~~Who wins in the game of life
~~~Who bemoans
~~~Who cares
~~~Everything stands still
~~~No desire left behind
~~~Love or longing
~~~Except for a quiet purposefulness
~~~That’s beyond thoughts and words
~~~The realm of solemn
~~~Unspoken deep silences
And a pregnant pause~~~